Sunday, 4 September 2016

वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्न कुरुमे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभः। 
निर्विघ्न कुरुमे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।


आज गणेशजी का जन्म अथवा प्राकट्य दिवस है जो भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से अनंत चदुर्दशी तक मनाया जाता है (इस वर्ष 5-15 सितंबर)। गणेशजी की मूर्ति की स्थापना कुछ लोग घरों में करते हैं जो 3, 5 या 10 दिन के लिए की जाती है। इसके लिए मिट्टी की मध्यम आकार की प्रतिमा ही उपयुक्त रहती है जिसके विसर्जन में कठिनाई न हो और नदी आदि का जल भी प्रदूषित न हो। आज प्रतिमा स्थापना का शुभ समय प्रातः 11:35 से अपराह्न 1:50 तक है। गणेश प्रतिमा की प्रायः पीले व लाल रंग में ही पूजा की जाती है। इसके अतिरिक्त नीले रंग के उच्छिष्ट गणेशजी तथा हरिद्रा लेपन गणेशजी की पूजा विशेष दशाओं में की जाती है। एकदंत श्यामवर्ण अद्भुत पराक्रम देते है, वहीँ श्वेत गणपति ऋणमोचन कहे जाते हैं। चार भुजाओं वाले रक्तवर्ण सभी संकट दूर करते हैं। त्रिनेत्र, दस भुजा धारी, रक्तवर्ण में सारे गणपति समाहित हैं। गणेशजी को मोदक और मुलायम हरी दूब, पीले वस्त्र व फल-फूल तथा सिंदूर अत्यंत प्रिय है। इन्हें कभी तुलसीदल अर्पित न करें तथा काले वस्त्र पहन कर पूजा न करें। आज के चंद्रमा को नीची निगाह करके ही अर्ध्य दें। आज के चंद्रमा के दर्शन शुभ नहीं कहे जाते। कृष्णजी का स्मरण करने से इसकी निवृत्ति हो जाती है। -विजय के भटनागर

Sunday, 21 August 2016

वृत्त

जीवन एक वृत्त है।
वृत्तों की परिक्रमा करते
बीतता है जीवन।
एक वृत्त की परिक्रमा
पूर्ण होने पर
वह वृत्त खुल जाता है
एक सीधी राह
बन जाता है।

परिक्रमा

एक चींटी ने
एक घेरे की परिक्रमा की
और बोली -
कितनी सीधी राह है!