Tuesday, 21 November 2017

फेयरी क्वीन

हमारी 'फेयरी क्वीन' विदेशियों की पसंदीदा ट्रेन है। इसका इंजन विश्व का सबसे पुराना स्टीम इंजन है। पिछले दिनों के प्रदूषण का प्रभाव इस ट्रेन पर भी पड़ा। इस सीजन के दूसरे ट्रिप, 11 नवम्बर, में ही इसमें मात्र 11 यात्री थे। इनमें भी कोई विदेशी पर्यटक शामिल नहीं था। विदेशी पर्यटक कम होने का एक कारण इसका शॉर्ट ट्रिप भी बताया जा रहा है। पहले फेयरी क्वीन, अलवर के सरिस्का तक, दो दिन का ट्रिप कराती थी। पिछले दो सालों से इसका ट्रिप रेवाड़ी तक कर दिया गया, जबकि रेवाड़ी टूरिस्ट स्पॉट नहीं है। शायद यह सीएमडी श्री अश्वनी लोहानी की अनुपस्थिति में लिया गया निर्णय है। (इस अवधि में वह लगभग दो वर्ष के लिए एयर इंडिया के सीएमडी रहे।)

फेयरी क्वीन की मेंटेनेंस रेवाड़ी हेरिटेज लोको शेड में की जाती है। 2012-15 के मध्य बॉयलर में खराबी के कारण यह ट्रैक पर नहीं आ पाई। 2016 में जब यह दोबारा आई तो पर्यटकों में इसका अत्यधिक क्रेज़ था। इस ट्रेन की वापसी डीज़ल इंजन से हो रही है। यह भी इसके आकर्षण में कमी का एक कारण है। इसका तकनीकी कारण है रेवाड़ी पर इंजन मोड़ने की व्यवस्था न होना। वर्तमान स्थिति में इसे मोड़ने पर 2-3 घंटे का समय लग सकता है जिससे अन्य रेलगाड़ियों में भी देरी होगी। ट्रेन के दोनों ट्रिप में बायलर में खराबी आना चिंता की बात है। पहले ट्रिप में गढ़ी हरसरु स्टेशन के निकट बॉयलर खराब हो गया था। किसी तरह लो स्पीड पर ट्रेन को गंतव्य तक लाया गया। दूसरी बार आरम्भ से ही बॉयलर काम नहीं कर रहा था। किसी तरह लो प्रेशर में ही इंजन को रवाना किया गया; किंतु इसके कहीं भी रुकने का डर बना रहा। अप्रैल 2018 तक फेयरी क्वीन हर दूसरे शनिवार को रवाना होगी। अब रेवाड़ी के सफर के दौरान इसमें 2 टन कोयले और 9000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। पानी का टैंकर छोटा होने के कारण इसे रास्ते में दो जगह रोका जाता है। इसका सामान्य किराया 6480 तथा बच्चों के लिए 3240 है। कुछ समय पहले ही 'करीब करीब सिंगल' फिल्म की शूटिंग में भी फेयरी क्वीन का उपयोग किया गया।             (साभार: न.भा.टा)

Wednesday, 8 November 2017

सहृदयता..

अशोकवाटिका में सीताजी को कष्ट सहते देख देवलोक में देवी पार्वती को अपार व्यथा होती और वह शंकर भगवान से इसके निवारण को कहतीं। उनकी यह व्यथा सीताजी के प्रति सहृदयता है। अर्थात सहृदयता एक दैवीय गुण है। वर्तमान समय में भी कुछ लोग सहृदयता से परिपूर्ण हैं व दूसरों के दुःख में साथ देने का प्रयास करते रहते हैं। नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ऐसे ही एक सहृदय भारतीय हैं जिनका जीवन बच्चों का जीवन बेहतर बनाने लिए समर्पित है जिसके लिए वह विश्व के 150 देशों के 83000 से अधिक बच्चों के लिए कार्य कर चुके हैं। कुछ अन्य लोग भी अपने क्षेत्र में इसी सहृदयता से कार्य करते रहते हैं। ऐसे व्यक्ति निश्चय ही औरों को शीतल छाया देने वाले विशाल वृक्ष की तरह हैं। दूसरी ओर, बेल अथवा कमज़ोर लताओं की यह प्रवृति अथवा विवशता है कि वे अपने निकटतम पेड़ के तने से लिपट जाती हैं।। अपने कार्य के प्रति समर्पित रहते हुए अपने कार्यक्षेत्र व अपने असंख्य कर्मचारियों के जीवन में परिवर्तन लाने का भाव श्री अश्वनी लोहानी के व्यक्तित्व में भी सहज देखा जा सकता है। उनकी कोई पोस्ट किसी भी विषय अथवा कार्य से संबंधित क्यों न हो, अनेकानेक कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत समस्याएं उनके सम्मुख ले आते हैं। एक साधारण कर्मचारी अपने सीएमडी को अपनी पहुंच की सीमा में देखकर भावविभोर हो जाता है। यह 'अनौपचारिक मिलन' उनकी सहृदयता के ही कारण है। औपचारिक रूप में तो 'थ्रू प्रॉपर चैनल' नियमानुसार न चलना स्वयं ही अनुशासनात्मक कार्रवाई के अंर्तगत आता है। शायद आज भी एक कर्मचारी अपनी कोई शिकायत एक-दो स्तर ऊपर तक ही कर सकता है। विन्रम निवेदन है, कोई भी कर्मचारी अपनी किसी शिकायत अथवा आवेदन आदि की प्रतिलिपि सीएमडी को भी सूचनार्थ भेजने को स्वतंत्र होना चाहिए ताकि एक निर्धारित अवधि तक निचले स्तर पर कोई कार्यवाही न होने पर वह उनसे मिल सके।। अंत में, जैसा व्यवहार हम औरों से चाहते हैं, हमें भी अपने संपर्क में आए लोगों से करना चाहिए। यदि हम सब मात्र अपने एक-एक निकटवर्ती घर के ही दुःख में सहायक होने लगेंगे तो स्वयं ही हमारा एक खुशनुमा समाज बन जाएगा!

Friday, 3 November 2017

'ऑरा' (Aura)

"ऑरा" (Aura)

वो कहते हैं
तुम्हारा एंटीना ही
(मेड इन ...)
कृत्रिम है
गलत खबरें 'पिक' कर
प्रसारित कर रहा है..
काफी समझाया कि
एंटीना स्वदेशी है --
कायनात का कण-कण ही
आपके गुण गा रहा है
आपके निर्णयों से अभिभूत
एक सामान्य जन भी
अश्रुपूर्ण शुभाशीष
बरसा रहा है..
आपके मुखमंडल पर
उच्च विचारों का 'ऑरा'
हर ओर प्रकृति को
जगमगा रहा है..
अपनी विद्युतीय तरंगे
स्वयं ही एंटीना तक
पहुंचा रहा है --
मुझे ही नहीं
सभी को आपका यह
भव्य स्वरूप
भरमा रहा है!
 
(अश्वनी लोहानी जी के प्रति)