प्लास्टिक के लोग!
पहले लोग एक-दूसरे को
शुभकामनाओं सहित
फूलों के गुलदस्ते भेजते थे
(कुछ अब भी गुलाब के फूल की
एकाध टहनी भेजते हैं)
फिर नकली प्लास्टिक के
फूलों का ज़माना आया
और चला भी गया
अब डिजिटल फूल
हंसती इठलाती स्माइलियां
सरल सर्वत्र उपलब्ध हैं
मुफ्त ..
पर अब लोग व
मानदंड बदल गए --
अंगुली टच-स्क्रीन से ही
परहेज करनी लगी ..
कइयों के व्यक्तित्व को ही
यह सब अखरने लगा
उन्हें खुद को ही
प्लास्टिक मानव कहना
भाने लगा!
-विजय के भटनागर, 'परिक्रमा' ब्लॉग स्पॉट.कॉम
No comments:
Post a Comment