मां दुर्गा के नवें रूप 'सिद्धिदात्री' में पहली आठों देवियों के रूप भी समाहित माने जाते हैं। मां सिद्धिदात्री का पूजा-मंत्र है:
सिद्धगन्धर्वयक्षद्यायै, असुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात, सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।
अर्थात 'सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, असुर और अमरता प्राप्त देवों के द्वारा भी पूजित और सिद्धियां को प्रदान करने वाली देवी हमें भी आठों सिद्धियां प्रदान करें।'
प्राचीन शास्त्रों में वर्णित आठ सिद्धियां -- अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्व -- इन्हीं देवी की पूजा और कृपा से प्राप्त की जा सकती हैं। हनुमानजी को यह सभी सिद्धियां सीताजी ने प्रदान की थीं जिनसे वह अनेक असाध्य कार्य भी कर पाए। हनुमान चालीसा में भी यही वर्णन है कि 'अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस वर दीन्ह जानकी माता'। भगवान महादेव ने भी देवी सिद्धिदात्री की कठिन तपस्या कर इनसे यह सिद्धियां प्राप्त की थीं और इन्हीं देवी की कृपा से महादेव की आधी देह देवी की हो गई थी और वह अर्धनारीश्वर कहलाए। यह देवी कमल-पुष्प पर आसीन हैं। इनका वाहन भी सिंह है।
प्रायः अधिकांश देवियों का वाहन सिंह क्यों? अनादि काल मे पार्वतीजी घोर तपस्या में लीन थीं। तभी एक भूखा शेर उनकी ओर आया और उनका तप पूर्ण होने की प्रतीक्षा करने लगा। कई वर्षों की प्रतीक्षा में शेर बेहद कमज़ोर हो चुका था। देवी ने उसकी प्रतीक्षा को ही तपस्या मानकर उसे अपना वाहन बनाया।
Wednesday, 16 May 2018
मां
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