Saturday, 1 April 2017

पंखा


देर-सवेर भगवान सबकी सुनता है। आज हमारे पास अपना पंखा है। वो भी दिन थे, जब जयपुर ट्रांसफर के दौरान, मकान-मालिक के कूलर की "आवाज़" से ही सो जाते थे। एक बार उनका शुक्रिया क्या किया.. बिजली का बिल आधा-आधा करना पड़ गया!

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