बहुत डराता है यह ('ब्लड क्लॉट')!
29 फरवरी को जन्में लोग भी न, साठ साल की उम्र में भी पंद्रह साल के बच्चे जैसी बातें करते हैं। अब मेडिकल इंश्योरेंस का प्रीमियम इस उम्र में पच्चीस हजार सालाना तो बनेगा ही। इसी उलझन में थे कि इतना तो दे नहीं सकते, फिर पांच की बजाय तीन-साढ़े तीन लाख का इंश्योरेंस करा लेते हैं। तभी किसी को देखने अपोलो जाना पड़ गया। एक संबंधी का लिवर ट्रांसप्लांट हुआ था। डोनर उन्हीं की पत्नी थीं जिन्हें एक सप्ताह बाद छुट्टी दी जा रही थी। उनके पति को अभी दस दिन और हस्पताल में रहना होगा। जहां उनकी इस दशा ने मन को झकझोर दिया, वहीं महिला के प्रति मन श्रद्धा से नतमस्तक हो गया। बातों-बातों में पता चला कि कहीं-कहीं की सिफारिश पर वहां दाखिला मिल पाया -- कुल 22 लाख के खर्चे पर। अन्य हस्पतालों में यह 'पैकेज' 35 लाख का सुनने में आया। कहते हैं किसी को विपदा में देखकर मानव मन तत्काल स्वयं की उस स्थिति में कल्पना करने लग जाता है। हम तो अभी 20-25 हजार के प्रीमियम पर ही नाप-तोल कर रहे थे। अब तो मन ऐसा बावला हुआ कि घर आते ही भगवान की मूर्ति के पांव पकड़ लिए कि -- "दोनों समय गीता पढूंगा.. मैं नहीं कर सकता इतना सब कुछ.. आप ही बचा लो.. मुझे नहीं लेना कोई इंश्योरेंस.. मुझे नहीं डलवाने स्टेंट्स.. कहीं दिल-दिमाग की किसी नस में कोई ब्लड-क्लॉट आ जाए तो आप ही फूंक मार देना!".. भगवान जी ने व्यंग किया: "मेरी एक फूंक से तो सारी सृष्टि हिल जाएगी.. किसी इमरजेंसी में तो एमडी साहब ही एक फोन कर देंगे.. अब तो फेसबुक-फ्रेंड भी हैं.. कल ही तो इतरा रहा था!" .. जब अंत तक हमने भगवान के चरण नहीं छोड़े तो यह निर्णय हुआ कि भले ही हम 20 हजार प्रीमियम की मेडिकल पॉलिसी न लें, पर जन्माष्टमी पर मंदिर में चढ़ाए 10-10 रुपये के दो खोटे सिक्कों के बदले अपना सारा खोटापन बदल कर ईश्वर के ही सच्चे नाम का आश्रय लेंगे।
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