Monday, 9 July 2018

एक बंगला बने न्यारा..

दादा जी के समय का कॉन्सेप्ट:
एक बंगला बने न्यारा, रहे कुनबा जिसमे सारा!
पिता जी का समय:
दो सौ गज़ का प्लॉट लेकर सब भाई अपना-अपना ऊपर बनवाते रहो!
हमारा समय:
"रोज़-रोज़ के झगड़ों से अच्छा है अलग-अलग फ्लैट्स!"
बच्चों का समय:
Cousins के नाम भी नहीं जानते। बस, दूर से ही फ्लाइंग-किस्स!..

(सामने वालों की बिटिया डोली से उतर कर वापस घर कुछ लेने भागी तो लोगों ने कहा: "क्या रह गया? ऐसे अशुभ होता है!" --"आपको शुभ-अशुभ की पड़ी है --मेरा पतली पिन वाला चार्जर नहीं मिल रहा!!")

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