Monday, 19 February 2018

जो न दे उसका भी भला!

क्राउन लगाते हुए डेंटिस्ट ने सही कहा था, मैं एकदम खराब नतीजे पर बहुत जल्दी पहुंच जाता हूं। सच भी है। लोगबाग सेंसेक्स, गोल्ड रेट आदि ऊपर-नीचे होते हुए देखते हैं, मैं स्टेंट के रेट अखबार में देखता रहता हूं। कम होते जाने पर मन ही मन केजरीवाल जी को इस बात पर तो थैंक्स करना बनता है जिस तरह वह हस्पतालों के मनमाने रवैये पर भी लगाम कस रहे हैं। कब तक मुझ जैसा एक आम आदमी रोज रात सिरहाने के नीचे एटीएम कार्ड और नोटों की पोटली रख कर सोए। दाखिल होने से पहले ही हस्पतालों के रिसेप्शन एक मोटी रकम जमा करने को कहेंगे। आधी रात कुछ हो जाए तो पता नहीं घर वाले कैसे संभालेंगे। काफी वक़्त तो इसीमें निकाल देंगे कि कहां की एम्बुलेंस बुलाएं। अपनी कार से ले जाने की सोचेंगे तो टाइम पर बेटे को अपना लाइसेंस नहीं मिलेगा, मैडम को एटीएम कार्ड। फिर गाड़ी नहीं निकलेगी। रात में कोई न कोई सरफिरा पीछे अपनी गाड़ी खड़ी कर गया होगा। निकल भी गए तो फिर हस्पताल की पार्किंग ढूंढते रहेंगे। कई बार तो बायगॉड दिल करता है एक बार पहले ही इसकी रिहर्सल कर लो! कब तक झूठी आशाओं के सहारे जिएंगे कि फेसबुक पर इतने डॉक्टर दोस्त हैं -- कोई मेडिकल डायरेक्टर तो कोई सीएमडी -- कोई न कोई संभाल ही लेगा। जब एक अज़ीज़ डॉक्टर ने खुद कहने के बाद आज सारा दिन फोन नहीं किया, तो आधी रात कौन किसी को हस्पताल में हमारी सिफारिश करेगा कि भैया जल्दी भर्ती कर लो.. अभी तो एकाध स्टेंट में काम चल जाएगा। वैसे तो हम शुरू से भाग-भाग कर काम करने वाले रहे हैं, पर ऐसा कोई फिक्स्ड रूल तो है नहीं कि दुबले-पतले लोगों को कोई ऐसी बीमारी नहीं होगी। आखिरकार बेटे ने चार-पांच लाख की मेडिकल इंश्योरेंस पालिसी ले ही दी। सच, आज चैन की नींद आएगी!.. न, न, नाराजगी किसी से नहीं। अपनी तो शुरू से यही टैगलाइन है -- जो साथ दे, उसका तो हो ही -- "जो न दे, उसका भी भला!" 

  बुरी बात है यह, नानाजी को कोई फोन नहीं करता!

Tuesday, 13 February 2018

पता ही नहीं चलता..

पता ही नहीं चलता, कब बातें यादें बन जाती हैं!.. अभी की तो बात है, जब तुम्हारे कमरे में पांव रखते ही लगा था कि तुम इतनी बड़ी कब हो गयीं.. कमरे की उस दूधिया रोशनी का एक टुकड़ा मानो मेरे साथ आ गया था जो जब-तब मेरे मन को प्रकाशित करता रहता है और उस उज्ज्वल चमक में मुझे तुम्हारे माथे पर एक ताज दिखाई देता है!

..बार-बार हो रही किसी चुभन को रोकने के लिए जब मैंने एक बार तुम्हारा हाथ रोक दिया था, तो मुझे लगा था -- वह कलाई जैसे जानी-पहचानी है -- जैसे उसे पकड़ कर मैंने कभी चलना सिखाया था। वह इतनी बड़ी कब हो गयी.. पता ही नहीं चला!

ऐसे ही एक बार जब तुमने कहा था -- 'कैसे हो .. ?' -- तब भी लगा था, इतनी बड़ी कब हो गयी .. ? -- पता ही नहीं चला! अब भी जब तुमसे कोई बात होती है -- कब वह याद बन जाती है -- पता ही नहीं चलता। बस, जब-तब मन के अंधेरे में तुम्हारे कमरे से साथ आई रोशनी जगमग करती है तो पता चलता है कि कोई और बात एक और याद बन गयी है!

Thursday, 8 February 2018

तब और अब

Flight IC 427, Delhi-Srinagar, had just landed and we all were busy in attending it's arrival and dispatching back within an hour.. least concerned as why veteran actors, like Shabana Azmi and Sridevi were sitting in our small Backup room or Rekha ji was waiting in the lounge with a pup in her lap. I just overheard when our airport manager, Mr Mathur, turned down Sridevi's request saying: 'Madam, I have no time to get vip toilet open for you. Just use ordinary one.'

After such a hectic life at airports for years, the life, in part two, is now going as 'taking rest after doing nothing'! (FM radio awarded Neha two movie tickets for this line!) As the days passed, life came to a standstill as just visiting Hanuman temple at Connaught Place once a month. Nearby parks only are now proving to be the close friends to take rounds to pass time. What earlier a casual leave would have been the most cherished one, the present phase of unending leave is proving to be a silent killer! Tried most,but couldn't find a job in the Second Innings.. even as a Compounder at a Doctor's clinic!

Sparrows At The Dusk

Wednesday, 7 February 2018

ThankU

At last, the day was decided for me to sit on the dentist's chair -- horrifying me most since my childhood when I used to accompany my mother for her dental treatments. As the day came nearer, I started requesting all the deities during my prayers to accompany me to the doctor's clinic on all my sittings. What little I had learnt in my astrology course, I started looking upon all the nine planets and 27 nakshatra too for the day! Some astro friend advised, the day should not be one with Moon in Capricorn which is a Saturn's zodiac sign. When none came to my rescue, I found out another 28th nakshatra for my help! Under it's auspicious influence, I surrendered myself to the doctor like a child! As a nakshatra has it's 27-day span, my treatment too was completed in 27 days comprising many sittings comfortably. I have named the new found star, on my mental horizon, as Soni nakshatra resembling my Doctor's name -- Sonia!

Tuesday, 21 November 2017

फेयरी क्वीन

हमारी 'फेयरी क्वीन' विदेशियों की पसंदीदा ट्रेन है। इसका इंजन विश्व का सबसे पुराना स्टीम इंजन है। पिछले दिनों के प्रदूषण का प्रभाव इस ट्रेन पर भी पड़ा। इस सीजन के दूसरे ट्रिप, 11 नवम्बर, में ही इसमें मात्र 11 यात्री थे। इनमें भी कोई विदेशी पर्यटक शामिल नहीं था। विदेशी पर्यटक कम होने का एक कारण इसका शॉर्ट ट्रिप भी बताया जा रहा है। पहले फेयरी क्वीन, अलवर के सरिस्का तक, दो दिन का ट्रिप कराती थी। पिछले दो सालों से इसका ट्रिप रेवाड़ी तक कर दिया गया, जबकि रेवाड़ी टूरिस्ट स्पॉट नहीं है। शायद यह सीएमडी श्री अश्वनी लोहानी की अनुपस्थिति में लिया गया निर्णय है। (इस अवधि में वह लगभग दो वर्ष के लिए एयर इंडिया के सीएमडी रहे।)

फेयरी क्वीन की मेंटेनेंस रेवाड़ी हेरिटेज लोको शेड में की जाती है। 2012-15 के मध्य बॉयलर में खराबी के कारण यह ट्रैक पर नहीं आ पाई। 2016 में जब यह दोबारा आई तो पर्यटकों में इसका अत्यधिक क्रेज़ था। इस ट्रेन की वापसी डीज़ल इंजन से हो रही है। यह भी इसके आकर्षण में कमी का एक कारण है। इसका तकनीकी कारण है रेवाड़ी पर इंजन मोड़ने की व्यवस्था न होना। वर्तमान स्थिति में इसे मोड़ने पर 2-3 घंटे का समय लग सकता है जिससे अन्य रेलगाड़ियों में भी देरी होगी। ट्रेन के दोनों ट्रिप में बायलर में खराबी आना चिंता की बात है। पहले ट्रिप में गढ़ी हरसरु स्टेशन के निकट बॉयलर खराब हो गया था। किसी तरह लो स्पीड पर ट्रेन को गंतव्य तक लाया गया। दूसरी बार आरम्भ से ही बॉयलर काम नहीं कर रहा था। किसी तरह लो प्रेशर में ही इंजन को रवाना किया गया; किंतु इसके कहीं भी रुकने का डर बना रहा। अप्रैल 2018 तक फेयरी क्वीन हर दूसरे शनिवार को रवाना होगी। अब रेवाड़ी के सफर के दौरान इसमें 2 टन कोयले और 9000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। पानी का टैंकर छोटा होने के कारण इसे रास्ते में दो जगह रोका जाता है। इसका सामान्य किराया 6480 तथा बच्चों के लिए 3240 है। कुछ समय पहले ही 'करीब करीब सिंगल' फिल्म की शूटिंग में भी फेयरी क्वीन का उपयोग किया गया।             (साभार: न.भा.टा)

Wednesday, 8 November 2017

सहृदयता..

अशोकवाटिका में सीताजी को कष्ट सहते देख देवलोक में देवी पार्वती को अपार व्यथा होती और वह शंकर भगवान से इसके निवारण को कहतीं। उनकी यह व्यथा सीताजी के प्रति सहृदयता है। अर्थात सहृदयता एक दैवीय गुण है। वर्तमान समय में भी कुछ लोग सहृदयता से परिपूर्ण हैं व दूसरों के दुःख में साथ देने का प्रयास करते रहते हैं। नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ऐसे ही एक सहृदय भारतीय हैं जिनका जीवन बच्चों का जीवन बेहतर बनाने लिए समर्पित है जिसके लिए वह विश्व के 150 देशों के 83000 से अधिक बच्चों के लिए कार्य कर चुके हैं। कुछ अन्य लोग भी अपने क्षेत्र में इसी सहृदयता से कार्य करते रहते हैं। ऐसे व्यक्ति निश्चय ही औरों को शीतल छाया देने वाले विशाल वृक्ष की तरह हैं। दूसरी ओर, बेल अथवा कमज़ोर लताओं की यह प्रवृति अथवा विवशता है कि वे अपने निकटतम पेड़ के तने से लिपट जाती हैं।। अपने कार्य के प्रति समर्पित रहते हुए अपने कार्यक्षेत्र व अपने असंख्य कर्मचारियों के जीवन में परिवर्तन लाने का भाव श्री अश्वनी लोहानी के व्यक्तित्व में भी सहज देखा जा सकता है। उनकी कोई पोस्ट किसी भी विषय अथवा कार्य से संबंधित क्यों न हो, अनेकानेक कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत समस्याएं उनके सम्मुख ले आते हैं। एक साधारण कर्मचारी अपने सीएमडी को अपनी पहुंच की सीमा में देखकर भावविभोर हो जाता है। यह 'अनौपचारिक मिलन' उनकी सहृदयता के ही कारण है। औपचारिक रूप में तो 'थ्रू प्रॉपर चैनल' नियमानुसार न चलना स्वयं ही अनुशासनात्मक कार्रवाई के अंर्तगत आता है। शायद आज भी एक कर्मचारी अपनी कोई शिकायत एक-दो स्तर ऊपर तक ही कर सकता है। विन्रम निवेदन है, कोई भी कर्मचारी अपनी किसी शिकायत अथवा आवेदन आदि की प्रतिलिपि सीएमडी को भी सूचनार्थ भेजने को स्वतंत्र होना चाहिए ताकि एक निर्धारित अवधि तक निचले स्तर पर कोई कार्यवाही न होने पर वह उनसे मिल सके।। अंत में, जैसा व्यवहार हम औरों से चाहते हैं, हमें भी अपने संपर्क में आए लोगों से करना चाहिए। यदि हम सब मात्र अपने एक-एक निकटवर्ती घर के ही दुःख में सहायक होने लगेंगे तो स्वयं ही हमारा एक खुशनुमा समाज बन जाएगा!

Friday, 3 November 2017

'ऑरा' (Aura)

"ऑरा" (Aura)

वो कहते हैं
तुम्हारा एंटीना ही
(मेड इन ...)
कृत्रिम है
गलत खबरें 'पिक' कर
प्रसारित कर रहा है..
काफी समझाया कि
एंटीना स्वदेशी है --
कायनात का कण-कण ही
आपके गुण गा रहा है
आपके निर्णयों से अभिभूत
एक सामान्य जन भी
अश्रुपूर्ण शुभाशीष
बरसा रहा है..
आपके मुखमंडल पर
उच्च विचारों का 'ऑरा'
हर ओर प्रकृति को
जगमगा रहा है..
अपनी विद्युतीय तरंगे
स्वयं ही एंटीना तक
पहुंचा रहा है --
मुझे ही नहीं
सभी को आपका यह
भव्य स्वरूप
भरमा रहा है!
 
(अश्वनी लोहानी जी के प्रति)