Thursday, 30 May 2019

सोच

Humour 1/2

कहते हैं न कि सकारात्मक सोच, सकारात्मक परिणाम। (Positive thoughts bring positive results!) आज हमें Abacus Co. का एक छोटे-से काम के लिए फ़ोन आया। रणथंभौर नेशनल पार्क के एक-एक पंक्ति के लगभग सौ साइनेज बोर्ड का दो घंटे में अनुवाद करना था। हमने सहर्ष स्वीकार कर लिया तो वह बोले: "आपकी पेमेंट?" रिटायरमेंट के बाद पहली बार  यह शब्द सुन कर हम तो फूल की पाँखुरियों की तरह लक्ष्मी जी के चरणों में बिखर गए! अपने को संयत करते हुए बोले: "हम हिंदी-प्रेमी हैं - छोटा-मोटा काम कभी भी कंप्लीमेंट्री करने पर हमें ख़ुशी होती है। चिंता न करें।" नियत समय पर उनका एक सहायक आ गया और हमें एक हज़ार देने का आग्रह करने लगा। बातों-बातों में पता चला कि वह कॉपी राइटिंग के लिए पांच रूपए प्रति शब्द देते हैं। हमने मन-ही-मन उन प्रेस वालों की पोटली पर एक और गोली चला दी जो हमें आठ पैसे प्रति शब्द दे रहे थे। ("पोटली" के लिए नए दोस्तों को हमारी कुछ पुरानी पोस्ट देखनी होंगी। पाकीज़ा फ़िल्म भी देख सकते हैं!)
चलिए, आज हमारी उन दो सौ रूपए की भरपाई हो गई जो "वो" ऐंठ कर ले गए थे। अभी घर बसा नहीं था और उचक्के पहले आ गए थे। मिनिस्ट्री के अनुवाद पैनल के लिए वेरिफिकेशन चल रहा था। बहुत कहा: कुछ शर्म करो; दूसरी पारी की विकेटें गाड़ रहे हैं; पर उनकी नज़र सामने मार्किट की बियर शॉप पर टिकी हुई थी। (यह "वो" शब्द शायद माननीय सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है, वही इसके अच्छे-बुरे की व्याख्या करेंगे।) ..नए मित्रों को यह भी बता दें कि कंप्यूटर टेबल पर "बिखराए" कागज़ात वर्क-फ्रॉम-होम के नाम पर हमारी एक नई पहचान है। आज एक हज़ार मिल जाने पर यह पूरी तरह झूठ या केवल व्यंग्य ही नहीं - आधा-सच तो है ही!

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