Tuesday, 30 July 2019

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सालों से वह रेगिस्तान में भटकता रूखा-सूखा हो गया था --मानो 'प्यास' की जीवंत तस्वीर! खुद कहता, मेरा वीनस क्या अस्त हुआ, मेरे जीवन से तो प्यार ही चला गया। बावरा मन फिर भी उसे यहां-वहां तलाशता रहता है.. बस, एक बार मिलने की इच्छा होती है। तस्वीर में अधूरे रह गए रंगों को भर देने की इच्छा होती है। कहीं कुछ न मिलने पर उसने वर्चुअल वर्ल्ड का ही सहारा लिया। यहां भी किसी को तलाशता रहा। मेरी प्रोफाइल पिक्चर को देखकर उसे कुछ सुकून मिला।

वह अपने अतीत की यादें किसी किताब में संजो कर रखना चाहता था। उसने डरते हुए मेरी एक तस्वीर मांगी जो उसे अपनी किताब के कवर के लिए उपयुक्त लगती थी। उसे अच्छा लगा.. मुझे भी.. पता नहीं क्यों! कई बार वह मेरी तस्वीर को अपनी विगत यादों से जोड़ कर कुछ लिखता और मुझे भेजता। मेरे कोई जवाब न दे पाने पर उसका मन आशंकित हो जाता और वह उसे डिलीट कर देता। कई दिन तक जब-तब उसके 'सॉरी' के मैसेज मैं देखती। वह मेरे ऑनलाइन होने की इंतजार करता और उस समय फिर "सॉरी' दोहराता और एक स्माइली भेजने की रिक्वेस्ट करता। उसकी नादानियों पर एक रोज मैंने एक स्माइली भेजी तो वह खिल गया। बोला, "वो वाली.. जो वह भेजती थी.. बस, एक बार!" फिर डर कर उसने कई दिन तक कुछ नहीं लिखा। शायद मेरी तस्वीर से वह खूब बातें करता, पर मुझे कुछ भेजने पर उसका मन जैसे किसी अपराध भावना से भर जाता। मुझे भी उसकी कविताएं अच्छी लगतीं। एक बार मैंने कहा भी कि हम अच्छे दोस्त हो सकते हैं। उसने कहा, "ठीक है.. पर मैं तुम्हारी उस तस्वीर से प्यार करता हूं.. फिर मत कहना, पहले बताया नहीं!" (पिया की डायरी से)

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