भारतीय रेल के मस्कट "भोलू" गार्ड को देखकर गार्ड बाबू बड़े भैया की याद आ जाती है। अब भी रात में सिरहानेे टॉर्च रख कर सोते हैं। कभी रात में आंख खुलने पर, फर्श पर पांव रखने से पहले, टॉर्च जलाकर पता नहीं क्या देखते हैं। एक बार पूछ ही लिया। .."रेलवे ट्रेनिंग में सिखाया गया था कि रात में कहीं ट्रेन के रुक जाने पर नीचे उतरने से पहले टॉर्च जलाकर जरूर देख लें कि ट्रेन किसी पुल पर तो नहीं रुकी हुई.. वही आदत पड़ गई 37 साल की नौकरी में!" भोलू निडरता का भी प्रतीक है -- भैया भी। कभी जब उनकी गुड्स-ट्रेन काफी देर बीच जंगल में ही रुकी रहती तो वह नीचे उतर कर इंजिन ड्राइवर से ही इसका कारण पूछने चल देते थे। इंजिन की कूक और गार्ड की झंडी ही तब परस्पर बातचीत का साधन थे। भारतीय रेल अब अपने 164 स्वर्णिम वर्ष पूर्ण कर चुकी है। गार्ड भैया भी इस अवधि की आधी स्मृतियां तो मन में संजोए ही हैं!
Friday, 6 October 2017
"भोलू गार्ड"
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