प्लेटॉनिक/Platonic love
1. धुंधली-सी याद है एक फिल्म की। एक बच्चा फोन पर कुछ नम्बर डायल करता रहता है। एक बार वह एक्सचेंज में मिल जाता है। ऑपरेटर पूछती है:
- आपको किस से बात करनी है, बेटा?
- अपनी मम्मा से.. आसमान में!
ऑपरेटर को कुछ नहीं सूझता। वह बच्चे की संवेदना की खातिर अपनी सहेली से ही उसकी मां के रूप में बात करा देती है। यह क्रम जब-तब कई दिन चलता है। समय के साथ बच्चा सामान्य हो जाता है।
2. जुरासिक पार्क: रिटायरमेंट ब्लूज़ से गुजरते एक जज और जॉगिंग करती एक कम उम्र की लड़की एक-दूसरे की करीब आते हैं। जज पुनः नए उत्साह से भर जाते हैं और कुछ सजधज कर जॉगिंग के लिए आने लगते हैं। घर वाले भी यह बदलाव नोटिस करते हैं। बिना उन्हें जाने, एक रोज लड़की उन्हें बताती है कि कोई जबरन उनका घर खाली करा रहा है और उनका वकील कुछ नहीं कर पा रहा है। वह उसे एक उपयोगी सलाह देते हैं कि किस तरह उनका वकील आगे बढ़े। और वह केस जीत जाती है।
3. चीनी कम: तब्बू और अमिताभ मिलते तो यहां भी अनायास ही हैं। दोनों की उम्र में काफी फर्क है लेकिन एक-दूसरे के करीब आते हैं। यहां विषय यौन अतृप्ति से जुड़ा है, इसलिए इसे प्लेटॉनिक-लव नहीं कह सकते।
जिस तरह से हमारे शरीर में कोई व्याधि होने पर पहले हमारा इम्यून सिस्टम ही बाहरी रोगाणुओं से लड़ कर बीमारी खत्म करने का प्रयास करता है; शायद उसी तरह मन-मस्तिष्क की किसी उलझी समस्या में किसी विशेष व्यक्ति के करीब आकर हमें सुकून मिलता है। क्योंकि यह कोई सोचा-समझा प्रयास नहीं होता, इसलिए मैं इसे एक तरह से प्लेटॉनिक-लव ही कहूंगा, जिसमें नियति का भी कुछ अंश है।
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