Monday, 26 August 2019

"फ्लाइंग-वो"

"फ्लाइंग-वो"!
😘

फेसबुक पर पहले "लाइक" के अतिरिक्त कोई अन्य ऑप्शन था ही नहीं। जब कोई किसी दुर्घटना आदि की पोस्ट शेयर करता था तो उसे "लाइक" करते हुए बहुत अटपटा लगता था। मन तो यही कहना चाहता था कि हम आपका दुःख शेयर करते हैं, किन्तु "लाइक" की इमोजी सही भावार्थ व्यक्त नहीं करती थी। इस आशय की मेल हम मार्क ज़करबर्ग को भेजते थे। कई लोगों के ऐसे प्रयास का ही यह परिणाम था कि फेसबुक पर प्रतिक्रिया के अन्य विकल्प स्वरूप कई स्माइली सामने आईं। इनमें कई प्रेम की प्रतीक व चुम्बन आदि दर्शाती हैं। विदेशों में जहां यह एक सामान्य बात है, वहीं हमारे देश में ऐसी कुछ स्माइली चोरी-छुपे इस्तेमाल में लाई जाती हैं। राजन और विनीता एक-दूसरे को चाहते तो थे लेकिन उम्र में काफी अंतर था जो दोनों में एक अपराध भावना उत्पन्न करता था। यह तो दोनों को ही स्पष्ट था कि यह स्माइली एक इमेज मात्र है, फिर भी राजन बार-बार विनीता को एक बार वह स्माइली भेजने को कहता। अंततः एक बार विनीता ने वह 'फ्लाइंग किस' राजन को भेजी तो वह सामान्य हुआ.. नहीं तो उसने ठान लिया था कि यदि विनीता उससे सहज नहीं है तो वह उसे फ्रेंड लिस्ट से हटा देगा। एक और जगह तो इस 'फ्लाइंग किस' ने कहर ही बरपा दिया। लड़की के सिरहाने रखा मोबाइल मां के हाथ लग गया और उन्होंने फ्लाइंग "वो" (यहां खुलेआम 'कि$' की बातें नहीं करते) की गिनती कर ली कि कितनों को भेजी हैं। .. और फिर दे-दना-दन.. "बताओ, सत्तर को भेज चुकी फ्लाइंग-वो!" बात पड़ोस वाली दादी अम्मा तक पहुंची तो बुदबुदाईं, "इसीलिए इतने मोटे-मोटे होंठ हो रखें हैं मरी के!" एक ने और आग में घी डाला, "आजकल तो शादी से पहले लड़के वाले भी पूछ लेवैं कि कितनों को कर चुकी फ्लाइंग-वो!" .. बात धीरे-धीरे पिया के यहां भी पहुंची। "तेरा मोबाइल भी तकिये के नीचे रहता है.. गिनूं या खुद बताएगी?" मां ने पूछा तो डर कर पिया के मुंह से निकल गया, "बस, पचास, दो महीने में!" और जवाब में एक चपेट!.. पिया ने अपना बचाव किया, "फ्लाइंग-वो किसी फ्रेंड को थोड़ी, मैं तो उसकी लिखी गीता-रामायण की पोस्ट को देती हूं.. मेरी तो प्रोफाइल में भी शक्ल नहीं दिखती.. व्हाट्सएप पर भी राधा-कृष्ण की तस्वीर है।"  बेटी की समझदारी पर मां ऐसे मुस्करायी मानो कह रही हों: "जा, सिमरन, जा -- कर ले अपनी सेंचुरी पूरी!"
()यह पढ़कर मिसेज ज़करबर्ग की प्रतिक्रिया: 🤦‍♀()

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