Wednesday, 28 August 2019

शुभ यात्रा!

आपकी यात्रा शुभ हो!

कभी दिल्ली दिल-वालों-की कही जाती थी; अब संवेदनहीन है। कहीं कोई एक्सीडेंट हो जाए.. कोई गिरा पड़ा हो.. कोई मदद को नहीं रुकता। पुलिस को भी सामान्यतः कोई कॉल नहीं करता कि बेवजह उससे भी पूछताछ होगी। बड़ी-बड़ी सड़कें जरूर हैं, पर लोगों की ईगो उससे भी बड़ी है। "तेरी कार मेरी से आगे क्यों" - ओवरटेकिंग, रोड रेज, जरा 'टच' होने पर लड़ाई-झगड़े आम बात है। ठगी के नए-नए तरीके सामने आते हैं: खिड़की पर ठक-ठक कर कोई कहेगा, आपका टायर पंक्चर है.. नोट गिर गया है.. और आपके उतरने ही सीट पर रखा बैग गायब। इसका नाम ही 'ठक-ठक गैंग' है। लिफ्ट लेने के बहाने, लूट कोई बड़ी बात नहीं, चाहे लिफ्ट मांगने वाली लड़की ही हो। बैंक तक कैश लाना ले जाना, बैंक में ही कैश गिनना, एटीएम से पैसे निकालना भी कई जगह सेफ नहीं। घर पर काम करने वाले वर्कर्स भी अपनी पहचान के होने जरूरी हैं। छोटे बच्चों को किसी भी अंकल/आंटी के सहारे छोड़ना खतरे से खाली नहीं। सबसे बड़ा खतरा है अकेले होते हुए किसी कूरियर/वर्कर आदि के लिए घर का दरवाजा खोल देना। अभी एक खबर थी: फेसबुक से किसी छोटी लड़की की फोटो निकाल कोई अंकल बन उसके स्कूल उसे लेने पहुंच गया था। किसी अकेले बच्चे या महिला को कोई अकारण किसी का एक्सीडेंट हो जाने की झूठी खबर देकर साथ चलने को कहता है। यहां-वहां नौकरी दिलाने के झांसे देना एक आम बात है। रेलवे स्टेशन, बसअड्डे आदि से ऑटो, टैक्सी लेना भी भारी पड़ जाता है। यदि ऑटो वाला रास्ते से कोई दूसरी सवारी बिठाए या शेयरिंग के नाम पर उसमें पहले ही कोई बैठा हो तो बेहतर है, उसमें न बैठें। अपने कहीं आने-जाने की जानकारी किसी परिचित को जरूर दें। रास्ते में भी फोन पर किसी जानकार से अपने ऑटो आदि में होने की बात करते रहें (चाहे आप ऐसी बात करने का नाटक ही करें) ताकि ड्राइवर कोई दुस्साहस न कर सके। आप इस शहर में एकदम अनजान हैं, ऐसा जाहिर न होने दें। ज्वेलरी न पहनें, नकली भी नहीं। मोबाइल, पर्स आदि कस कर पकड़े रहें। किसी अनुचित बात पर ऊंची आवाज में बोलें ताकि अन्य लोग सुन सकें। स्वयं पर विश्वास रखें।

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