गर्मी के वो दिन.. जब पंखा झलते हाथ भी दुखने लगते थे.. तब हवा 'चलाने' के लिए क्या आप भी यह उपाय करते थे? अम्माजी कहती थीं, 21 ऐसे शहरों के नाम बोल दो जिनके अंत मे 'पुर' आता हो, जैसेकि सहारनपुर, फिरोज़पुर..आदि। इसी चक्कर में एकाध घंटा निकल जाता था। थोड़ी-बहुत हवा भी चलने लगती थी!.. आज बरसों बाद सोचा कि देखें वह 'पुर' कहीं हवा के संदर्भ में तो नहीं आता। केवल यही अर्थ मिले - भरा हुआ, पूर्ण, घर, बस्ती, अटारी, नक्षत्र-पुंज..आदि।
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