Monday, 29 May 2017

पुकार लो..

पुकार लो --
शायद रुक जाए
लौट आए
जाता हुआ
वसंत!..
समेट कर हमारी
सारी खुशियां,
बीते दिन;
बांध कर
हमारे प्यार का
बचपन,
यौवन --
वो
चला जा रहा है..
पुकार लो --
शायद रुक जाए
लौट आए
जाता हुआ
वसंत!

- विजय के भटनागर (1972)

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