पुकार लो -- शायद रुक जाए लौट आए जाता हुआ वसंत!.. समेट कर हमारी सारी खुशियां, बीते दिन; बांध कर हमारे प्यार का बचपन, यौवन -- वो चला जा रहा है.. पुकार लो -- शायद रुक जाए लौट आए जाता हुआ वसंत!
- विजय के भटनागर (1972)
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