Sunday, 11 June 2017

'आरोप'

वह आंगन बुहार रही थी --
मैं अखबार झाड़ता
झुंझला कर बोल उठा --
'क्यों आंखों में
धूल झोंक रही हो?'
वह गुर्रायी --
'दोष देना किसी और को,
मैं चली!'

-- विजय के भटनागर
   23.9.1975

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