Sunday, 4 June 2017

'आस'

सखि -
वो आए,
बैठे,
मेरी गठरी बंधाई,
आप उठाई;
फिर अस्तबल में जाकर
बोले-
मुझे कब डालोगी --
घास?!

--विजय के भटनागर
   (3.4.1980)

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