उसे थी खुजली, चमड़ी बदलती थी रंग; डॉक्टर के यहां 'संक्षेप में कहिए' का बोर्ड देख कर सकपका गया.. साफ-साफ कह गया -- 'प्लीज़ डॉक्टर, मुझे भैंस बनने से बचा लीजिए!'
-- विजय के भटनागर (1970)
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