कई बार सालों लग जाते हैं जानने में कि वह मज़ाक था या असलियत। सातवीं-आठवीं क्लास तक तो हम होशियार बच्चों में आते थे। कभी गलत जवाब भी टीचर अनदेखा कर जाते थे। एक बार पूछा गया: "सूरज कौनसी संज्ञा है -- व्यक्तिवाचक, जातिवाचक या भाववाचक?" हमने कह दिया: "जातिवाचक।" टीचर जी बोले: "हां, सूरज 12 होते हैं!" इस छटपटाहट में 40 साल गुज़र गए। अब तो कोई सच बता दो!!
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