Monday, 27 February 2017

गांव याद

-- "गांव याद" --

गए कैसे  थे, कैसे आए? बाबा तुम गांव से आए!
आती होगी कभी जब बरखा; बुढ़िया कातती है क्या चरखा?
जोहड़ सब भर जाते होंगे; टर्र-टर्र मेंढक टर्राते होंगे!
माली बाग़ का आता होगा; कागज़ की नाव चलाता होगा!
मेला सजता होगा रात भर; जाते है क्या सब ठेले पर?
भूली होगी मुझे ग्वालिन; नाचती थी जो जैसे नागिन!..
मोटर से गए, रेल से आए; मेले की मिठाई लाए..
बाबा तुम गांव से आए!!

- विजय के भटनागर
        (1970)

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