Thursday, 2 February 2017

झूमरी तलैया से..

-- "लो आ गए चेरापूंजी वाले!" हमारा बचपन चेरापूंजी में क्या गुज़रा, आज तक बारह महीने दिल्ली में भी छाता साथ रखने की आदत नहीं गई। दूर से ही लोग हमें पहचान जाते हैं। विलक्षण प्रतिभावान लोगों की शोहरत तो अपने शहर का नाम रोशन करती ही है, कुछ शहरों की विलक्षणता भी कई लोगों को मशहूर कर देती है। हमारा कोई फेसबुक फ्रेंड शायद ही हमें इतने लंबे तक समय याद रख पाए जैसे कि हम 50 साल से एक राधे श्याम पाहवा को याद रखे हुए हैं। कारण, बस, यही कि वह झूमरी तलैया से रेडियो पर अपनी पसंद का गाना सुनने के लिए विविध भारती को पोस्ट कार्ड लिखते रहते थे। दिन में दो-तीन बार "झूमरी तलैया से.." उनका नाम ज़रूर आता था। झूमरी तलैया नाम से ही मन झूम जाता था! इसी संदर्भ में कुछ अन्य नाम भी गूगल पर देखने को मिलते हैं। यह कोडरमा शहर की दामोदर घाटी में स्थित है।

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