बचपन से ही हमें रेलगाड़ी बहुत अच्छी लगती है। लगता है, रंग-बिरंगा एक पूरा शहर दौड़ रहा है और साथ-साथ सब चीज़ें घूम रही हैं! इंजन के साथ बस दो-चार डिब्बे तो हमें एक खुशनुमा परिवार का ही अहसास कराते रहे हैं। और अकेले इंजन को दौड़ते देख तो हमें लगता था, फटाफट अपने परिवार को लेने जा रहा है या ड्यूटी ऑफ कर घर भाग रहा है! रह गया उलटा इंजन -- इसने हमें बचपन से ही परेशान कर रखा है। उलटा इंजन जाते देख कर लगता है.. यह कुछ गड़बड़ करके आ रहा है..शायद किसी को कहीं छोड़ कर, किसी और से जुड़ने जा रहा है। कुछ बड़े हुए तो लगा कि जैसे यह किसी कोर्ट-केस से छूट कर भाग रहा है। धीरे-धीरे तो यह बात मन में पक्की हो गई कि यह 'डिवोर्स' देकर उलटे पांव भाग रहा है। और उस दिन तो उलटा इंजन देखने के अपशकुन पर मुहर ही लग गई जब एक बंद रेलवे क्रासिंग पर कार रोक कर हमनें एक अख़बार लिया। अभी करिश्मा कपूर के डिवोर्स की खबर पढ़ ही रहे थे कि सिटी मारता एक उलटा इंजन भाग गया!.. पंडित डॉट कॉम ने तो इसके उपाय के भी 1100 लेने शुरू कर दिए हैं। हम दोनों तो उलटा इंजन देखने पर, बस, कोई पिक्चर देख आते हैं!..
No comments:
Post a Comment