Thursday, 26 January 2017

मैं भी कर लूं..

"खुलेआम नकल चल रही थी। मैं भी कर लेता तो पास हो जाता!" ..बस, ऐसे ही समय गुज़र गया। कुछ ने फेल होने और नकल न करने पर शाबासी दी; कुछ ने सुनहरा अवसर हाथ से निकालने पर लताड़ा!.. पढ़े क्यों नहीं? इंटर का प्राइवेट फॉर्म भरा था। दो साल का नए विषयों का कोर्स और मात्र छः महीने का स्वयं तैयारी का समय। फिर बहती गंगा में हाथ क्यों नहीं धोए? ..बस, टीचर जी से 'अखियन याचना' करते रहते थे; वो 'खबरदार' का-सा संदेश देते। बजरंगी भाईजान की तरह परमिशन लेकर ही उस पार जाना चाहते थे!..

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