Monday, 16 January 2017

भूली-बिसरी यादें

रविवार, 7 जून, 1964 को हम कुछ बच्चे भागे-भागे रेलवे स्टेशन की ओर गए। 27 मई को चाचा नेहरू का स्वर्गवास हुआ था। 8 जून को प्रातः उनका अस्थि-विसर्जन संगम में होना था। दिल्ली से इलाहबाद के लिए एक विशेष ट्रेन को जाना था। बड़ी-बड़ी शीशे की खिड़कियों से सुसज्जित एकदम सफेद रंग के एक विशेष कम्पार्टमेंट में अस्थि-कलश को परिवार के सदस्य तथा अन्य गण्य-मान्य व्यक्ति लेकर जा रहे थे। उस सफेद कम्पार्टमेंट की कुछ ऐसी छवि मन में है; यद्यपि संबंधित फोटो हमें किसी कलेक्शन में नहीं मिल पाई। जहां से भी वह ट्रेन गुज़रती, लोग उत्सुकता से देखते और अपनी भावभीनी विदाई देते!

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