--"क्यों सब भाग रहे हो?"
--"आगे निकलने के लिए.. किसी को पीछे छोड़ने के लिए.. किसी को ढूंढने के लिए.. किसी को अड़ंगी मार गिराने के लिए..!" ढूंढने वाला भी उतनी तेज़ दौड़ रहा है.. जो खो गया, पीछे छूट गया, वह भी उसी गति से दौड़ रहा है! अरे, कोई तो रुको.. यूं भागते तो उतना ही फासला बना रहेगा। इसी तरह हम सब भाग रहे हैं - बेखबर, कि जिसमें दौड़ रहे हैं, वह एक घेरा है - सब उसी घेरे की ही परिक्रमा करते अपने-अपने ढंग से स्वयं को दौड़ में विजेता मान रहे हैं! इस अंधाधुंध दौड़ से बाहर हो, हम उलटा क्या चले -- सब बिछुड़े मिल गए! यहां भी जो हमारे लिए नहीं रुका, वह कभी हमारा था ही नहीं!..
No comments:
Post a Comment