Monday, 16 January 2017

भाभी जी

पंजाब में चार जमात पंजाबी क्या पढ़ी, दिल्ली आते ही सामने वाली भाभी जी ने जॉब भी लगा दी। (नहीं, नहीं, यह अंगूरी भाभी जैसी बात नहीं।) मैं तो तब दस साल का था। अपना दूध लेने जाता तो वह भी अपना लौटा पकड़ा देतीं। "भाभी" शब्द पहली बार मैंने दूध वाले से ही सुना: "आ गया भाभी का नौकर!" सुन कर बड़ा अजीब लगता। जब तब वह कह देतीं: "मेरी एक चिट्ठी लिख देगा?" पोस्ट कार्ड तब 5 पैसे का था। बेचारे का कचूमर ही निकल जाता। ज़रा-सी खाली जगह देखते ही वह कहतीं - यहां इसको प्यार, उसको पैरी पैंना.. लिख दे। एक बार तो हद हो गई जब उन्होंने पते वाली जगह पर कार्ड उलटा करके एक लाइन लिखने को कहा। मैंने कहा: "देखना, आप पर फाइन लग जाएगा। ऐसे 10 पैसे वाला लिफाफा कौन खरीदेगा?" संयोगवश जल्दी ही पोस्ट कार्ड का दाम बढ़ गया जिसकी ज़िम्मेदार वह खुद को मानती रहीं। इन 40 सालों में मैं भी पंजाबी लिखना भूल गया। पढ़ लेता हूँ।

No comments:

Post a Comment