Saturday, 28 January 2017

बड़े भैया


थापर कॉलेज, पटियाला और दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज में भी बड़े भैया को दाखिला मिल रहा था। पिता जी अकेले कमाने वाले थे। नहीं पढ़ा पाए। रेलवे में नौकरी भी मिली तो 'यार्ड फोरमैन' की। अभी बीस साल के भी नहीं थे। सुनसान रेल लाइनों में घूमते रात में डर जाते थे। लोग भुतहा सिग्नल की कहानियां सुनाते रहते थे कि वो सिग्नल रात में अपने आप ऊपर हो जाता है और ट्रेन रुक जाती है। एक बार 'ऑन ड्यूटी' दिल्ली आए थे। साथ में ट्रेन को दिखाने की लालटेन भी लाए थे। हमें तो उस लालटेन से ही डर लगता था। जल्द ही उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी। अन्य नौकरी के साथ-साथ आगे पढ़े और मुझे भी पढ़ाया।

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