याद करें, माता-पिता के साथ आपने पहली फिल्म कहां कौनसी देखी थी। मैंने माता-पिता के साथ 'मां-बाप' ही पहली फिल्म देखी, शायद 1959 में; क्योंकि सन '60 का तो मुझे ठीक से याद है कि बड़े भैया के साथ 'जिस देश में गंगा बहती है' देखी थी.. खड़े रह कर! पटियाला रेलवे स्टेशन के पास नए बने 'केपिटल' सिनेमा में पहला 'फ्री-शो' था। आखिर सात-आठ साल के बच्चे के मानस-पटल पर कौनसी तस्वीरें अंकित रह जाती हैं? पहाड़ी बैक-ग्राउंड में डफली बजाते राजकपूर जी के कुछ दृश्य याद रहे। 'दो आंखे बारह हाथ' के गीत का भी एकाध दृश्य अभी तक याद है। 'चलती का नाम गाड़ी' को तो मैं (अपनी और से सही करके) 'चलती गाड़ी का नाम' कहता था। यह फिल्में कभी-कभार हमारी रेलवे कॉलोनी में दिखाई जाती थीं। प्लेटफार्म पर पार्सल-वैन से उतरा ऐसा फिल्मी सामान देख कर हम बच्चे दूर-दूर तक तहलका मचा देते थे। फिल्म चलाते हुए कई बार रील बदली जाती थी। कई बार मन में एक सवाल आता था कि बीच में लगे सफेद परदे पर जो हम फिल्म देख रहे हैं, क्या परदे के पिछली ओर भी नज़र आ रही होगी?!..
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