Friday, 27 January 2017

पिता जी!

बहुत छोटा था। गर्मी के दिनों रेलवे प्लेटफार्म पर पिता जी के साथ घूम रहा था। प्यास लगी थी। पानी पिलाने वाला बाल्टी में लौटा डाल कर पानी पिला रहा था। छोटे-छोटे हाथों से 'ओक' ठीक न बनने पर पानी पिया कम जा रहा था, बिखर ज़्यादा रहा था। पानी पिलाने वाले ने मुझे डांटा। पिता जी ने उसे डांटा। अच्छा लगा था। अभी तक याद है!..

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