बड़े भैया ने रेल की खिड़की से बाहर झांकते हुए कहा: "मेरी आंख में एक बड़ा-सा कोयला गिर गया है।" तुरंत हमने कहा: "चुप! घर जाकर अंगीठी सुलगाने के काम आएगा!" सन '68 में प्रकाशित यह पहला चुटकुला हमारा मितव्ययी दृष्टिकोण ज़ाहिर करता है। बस, ऐसे ही अब तक बिना बैंक गए काम चला रहे हैं। ..दे दिए मोदी जी को 50 दिन!
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